रस: परिभाषा, अंग, निष्पत्ति एवं सभी रसों के उदाहरण | Mains Education हिंदी साहित्य: रस (परिभाषा, अंग, निष्पत्ति एवं उदाहरण) प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, State PSC, MPPSC, REET, CTET) हेतु महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री — Mains Education 1. रस की परिभाषा (Definition of Ras) काव्य को पढ़ने, सुनने या नाटक को देखने से पाठक, श्रोता या दर्शक को जिस अलौकिक आनंद की प्राप्ति होती है, उसे रस कहते हैं। हिंदी साहित्य और काव्य शास्त्र में रस को "काव्य की आत्मा" माना गया है। आचार्य विश्वनाथ के अनुसार: "वाक्यं रसात्मकं काव्यम्" अर्थात रसयुक्त वाक्य ही काव्य है। 2. रस निष्पत्ति (Ras Nishpatti) रस निष्पत्ति का सिद्धांत सबसे पहले भरत मुनि ने अपने ग्रंथ 'नाट्यशास्त्र' में दिया था। उन्होंने रस निष्पत्ति का प्रसिद्ध सूत्र प्रतिपादित किया: रस सूत्र: "विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्तिः" अर्थ: विभाव, अनुभाव और व्यभिचारी (संचारी) भावों क...